नदी की धार पर जीवन
लगे बेकार सा जीवन
न कोई साथी न संगत
चले बस आर पे जीवन
अर्थ जीवन का है गेहरा
बहे किस पार ये जीवन
समा कर खुद को खुद में
अकेला क्यूँ चले जीवन
"सैफ़" ये कैसी है मुश्किल ?
चले बिना अर्थ के जीवन
समा कर खुद को खुद मेंअकेला क्यूँ चले जीवन badhia rachna.
न कोई साथी न संगतचले बस आर पे जीवन Bahut sundar panktiyan hain!
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2 comments:
समा कर खुद को खुद में
अकेला क्यूँ चले जीवन
badhia rachna.
न कोई साथी न संगत
चले बस आर पे जीवन
Bahut sundar panktiyan hain!
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