ek sehar ki talash hai
Monday, March 2, 2009
सोच
मैं जानता था
ये एक दिन होने वाला है
तो इसमे ये हेरत केसी
तुम्हे आना था मेरे करीब तुम आ गयी
तो अब तुममे ये गेरत केसी
तुम तो कहती थी
हम न बदलेंगे कभी
फ़िर तुम ने बदली फितरत केसी
1 comment:
Anita B...
said...
badlaav zindagi or prakati ka niyam hai...
March 4, 2009 at 11:16 AM
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Mohd. Sarfaraz
लेखन उत्तम धन कर दे मन को प्रसन्न. आपके विचारों को कोई पढता है तो वो आगे के लिए आप का मार्ग प्रदर्शक बनता था , अपने विचारों को रखने का ब्लॉग से अच्छा कोई साधन नहीं है . धन्यवाद मित्र मनु और blogspot जिसने मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया .
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badlaav zindagi or prakati ka niyam hai...
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