Monday, March 2, 2009

ख्वाब

ऐ खुदा ऐसा हो मेरा मकान
जो हो मेरे माँ - बाप की शान
मेरे दिल अज़ीज़ भाइयों की जा
और वहां हो तुम्हारा अलग मुकाम
ये खुदा ऐसा हो मेरे मकान
बजे मन्दिर में घंटियाँ
सबके कानों तक पहुचे अजान
में कहूँ अल्लाहु , तुम्हारे ॐ में छुपे भगवान
एक ही घर में दिखलादें हम
नवरात्रे और रमजान
ऐ खुदा ऐसा हो मेरा मकान

13 comments:

अभिषेक मिश्र said...

अच्छी शुरुआत. स्वागत.

Anonymous said...

हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है। आशा है आपके बहुमूल्य विचारों से हम लाभान्वित होंगे।

वर्ड वेरिफिकेशन हटा लेने से टिप्पणी देने वाले को असुविधा नहीं होगी

रश्मि प्रभा... said...

aapki rachna padhkar mera mann romanchit ho gaya....bahut achhi lagi

mark rai said...

हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है।

Anonymous said...

आमीन!

बहुत अच्छा.

अनूप शुक्ल said...

स्वागत है जी!

mastkalandr said...

Bhai mohd.sarfaraz.., bahut sundar kavita hai
bahut hi pyare vichar..,sab log yadi apne aachran mai ye gun le aaye to hamari duniya jannat ban jayegi.., abhnandan.., mk

anuradha srivastav said...

उच्च विचार....... आपकी मनोकामना कभी तो पुरी होगी।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर...चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.

Anita B... said...
This comment has been removed by the author.
Anita B... said...

hmmm...good luck for more creations!!
or ies kavita ki alag baat hai, jo ki agar vakai log apna lein to baat hi kya hogi..
congrats for gud starting!!

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

sadhuvad aapko, narayan narayan

ravi said...

kya bat hai bhidu

subhan allha subhan allha

lage raho bhidu......................................................